यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं नाबालिग

विवेक श्रीवास्तव,लखीमपुर खीरी / यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाकर नाबालिग फर्राटे से वाहन चला रहे हैं। सड़कों पर सरपट वाहन दौड़ाते नाबालिक न केवल आवागमन में परेशानी पैदा कर रहे हैं बल्कि दूसरों और  खुद की भी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

अंग्रेजी स्कूल के बच्चे है सबसे आगे

खासतौर से स्कूली बच्चों को दुपहिया वाहन दौड़ाते हुए देखा जा सकता है जिसमे सबसे आगे है इंग्लिश मीडियम स्कूल के बच्चे है

और ये और खतरनाक इसलिए भी हो जाता है,क्योंकि उन्ही स्कूलों और आस पास के रिहायशी इलाको में रहने वाले छोटे बच्चे इनकी फर्राटा भर्ती गाड़ियों से आये दिन चोटिल हो जाते हैं,

अब ये इनकी नादानी कहे या संवेदनहीनता कि हादसों को अंजाम देने के बाद ये पीछे मुड़ के देखना भी पसंद नहीं करते

 

इसके लिए जवाब देही उन स्कूलों की भी है जिनके परिसर में इन गाड़ियों को सुरक्षित पार्क किया जाता है,क्या स्कूल प्रशासन की यह ज़िम्मेदारी नहीं है कि वो ये सुनिश्चित करें कि कक्षा 10 का छात्र कैसे कोई दुपहिया वाहन से विद्यालय आ रहा है!

 

इसके लिए माँ बाप भी कम ज़िम्मेदार नहीं है,बल्कि वास्तविक उत्तरदायित्व उन माँ बाप का ही बनता है,जो लाडलों को वाहन मुहैया कराते हैं…….

 

नियम मुताबिक निर्घारित आयु पूरी किए बगैर वाहन चलाना गलत है। इनका लाइसेंस भी परिवहन विभाग जारी नहीं करता।

 

हो यह रहा है कि नाबालिग बेखौफ होकर बाइक और कार दौड़ा रहे हैं। स्कूल तक यह वाहन लेकर जाते हैं। यदाकदा यातायात पुलिस स्कूलों के बाहर नाकाबंदी करके सख्ती भी बरतती है।

 

इसके बावजूद बच्चे दुपहिया वाहन चलाने से बाज नहीं आते। नाबालिग के बिना लाइसेंस के पकड़े जाने पर यातायात पुलिस 1500 रू. जुर्माना वसूलती है।

 

परिजन भी कम जिम्मेदार नहीं

बच्चों को वाहन देने में उनके परिजन भी कम जिम्मेदार नहीं है। उनको कार और बाइक सौंप दी जाती है। बच्चों के हाथ में वाहन आते ही वे फर्राटे भरने लगते हैं। रफ्तार देख कई लोग भौचक्के रह जाते हैं।

 

ऎसे में दूसरे वाहन चालकों के लिए परेशानी पैदा करते हैं।

16 साल की उम्र के बाद ही लाइसेंस बनाया जाता है। यह लाइसेंस भी मात्र 50 सीसी इंजन तक के लिए ही देते हैं। इससे अधिक क्षमता का वाहन चलाने पर जुर्माने का प्रावधान है।

डॉन बास्को स्कूल पर लगाम न लगने का एक कारण ये भी है वहा पढ़ने वाले छात्र नेताओं के और बड़े अधिकारियों के बच्चे है।

यह है नियम

परिवहन विभाग के मुताबिक 16 साल या इससे ऊपर के बच्चों का ही वाहन का लाइसेंस बनाया जाता है। यह लाइसेंस भी 50 सीसी इंजन तक का बनता है।

 

यानि बच्चे मोपेड ही चला सकते है। बिना लाइसेंस के वाहन चलाना गलत है। 18 साल की उम्र होने पर ही दुपहिया या चौपहिया वाहन का लाइसेंस बनाया जा सकता है।‎

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