शहीद मनोज मिश्रा पर दीपक पाण्डेय ने लिखी कविता

लखीमपुर खीरी / हमारे कवि दीपक पांडेय जी एक सुन्दर लाइन आप सब के बीच

 

माता और सुहागिन विधवा बहनों के स्वर लिखता हूँ

और शहादत पर यू पी की चुप्पी बर्बर लिखता हूँ

उसका शव दो दहन हो गया मरघट के अवसानों में

उसी मनोज मिश्र की मान के आंसूं निर्झर लिखता हूँ

 

विधवा हुई सुहागन कैसे सूनी हुई कलाई है

बहन मनाये कैसे भाई-दूज खो गया भाई है

आन -बान पर जान गवां कर जिसने जिले की लाज रखी

उसके बेटे भटक रहे हैं कैसे दर दर लिखता हूँ

 

देश की खातिर जिसने आँखों का हो तारा दान किया

मातृभूमि पर जिसने अपना बेटा हो बलिदान किया

वही बुढ़ापे की लाठी था एक पल में जो दूर हुआ

बिन लाठी के काँप रहे अब कैसे थर थर लिखता हूँ

 

बूढी माँ की कोंख क्या उजड़ी पूरा खीरी रोया है

और फरीदाबाद में जिसने अपना बेटा खोया है

एक इकलाख मरा उसको पैंतालीस लाख दिए जाते

और शहीद के परिजन भटकें कैसे दर-दर लिखता हूँ

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दीपक पण्डित

लखीमपुर खीरी

उत्तरप्रदेश 9648463779

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